बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन "सेव द चिल्ड्रन" ने ग़ज़्ज़ा में तत्काल युद्धविराम का आह्वान करते हुए कहा कि मासूम बच्चे इस युद्ध का ईंधन बन रहे हैं।
सेव द चिल्ड्रन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ग़ज़्ज़ा में इस्राईली हमलों और नाकेबंदी से सबसे बड़ा नुकसान भूखे मासूम बच्चों का हो रहा है, जिनका इस संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं है।
बाल कल्याण संगठन ने बताया कि ग़ज़्ज़ा पर 11 दिनों के हवाई हमलों में 12000 से अधिक बच्चों की जान जाने का अनुमान है, जबकि वास्तविक संख्या बहुत अधिक है।
सेव द चिल्ड्रेन की रिपोर्ट में कहा गया है कि ग़ज़्ज़ा में इस्राईली हमले में मारे गए कुल लोगों में से एक तिहाई से अधिक बच्चे हैं। हर 15 मिनट में एक बच्चे की मौत हो जाती है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि रॉकेट और मिसाइलों की मार झेलने वाले डरे हुए बच्चे भूखे-प्यासे मर रहे हैं। उन तक सहायता नहीं पहुंच रही है और पानी और भोजन की भारी कमी है।
ध्यान रहे कि संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि ग़ज़्ज़ा के सभी अस्पतालों में बैकअप जनरेटर चलाने के लिए केवल 48 घंटे का ईंधन बचा है, जिससे बच्चों सहित हजारों मरीज़ तत्काल जोखिम में हैं।
ग़ज़्ज़ा पट्टी पर इस्राईल के आक्रमण और नाकेबंदी के 11 दिन बाद तक 3,478 से अधिक फिलिस्तीनी शहीद हो गए जबकि 10 लाख फिलिस्तीनियों को अपना घर छोड़कर दक्षिणी क्षेत्र में जाना पड़ा है।